प्रिन्सिपल के पद पर पदोन्नति का एकमात्र नियम
राजस्थान शिक्षा नियम 1970 का नियम 28/7 की व्याख्या
“यह की ग्रुप ‘डी’ (प्रिन्सिपल) में पदों पर पदोन्नति के लिए ग्रुप ‘ई’ (वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी) एवम् ‘एफ’ (हेडमास्टर/लेक्चरर) में वर्णित पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की सामान्य (कामन) वरिष्ठता उनकी संस्थायी नियुक्ति की तारीख में संदर्भानुसार अवधारित की जाएगी. आयोग का समिति द्वारा चयनित व्यक्तियों की पारस्परिक वरिष्ठता वह होगी जो आयोग या समिति द्वारा निर्दिष्ट की गई है. विभागीय पदोन्नति कोटा के प्रति चयन किए व्यक्तियों की पारस्परिक वरिष्ठता नियम 24 व २५ के अधीन अवधारित की जाएगी,”
नोट - ग्रुप के आगे सुविधा हेतु पद का नाम कोष्ठक में दिया गया है >
Ø प्रिंसीपल = ग्रुप ‘डी’ = ग्रुप ‘घ’
Ø वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी = वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी = वाईस -प्रिन्सीपल = हेडमास्टर उच्च माध्यमिक विद्यालय = ग्रुप ‘ई’ = ग्रुप ‘ङ’
Ø हेडमास्टर/लेक्चरर = प्रधानाध्यापक, माध्यमिक विद्यालय = ग्रुप ‘एफ’ = ग्रुप ‘च’
Ø लेक्चरर = प्राध्यापक = व्याख्याता, स्कुल शिक्षा = ग्रुप ‘एफ’ = ग्रुप ‘च’
नियम 28/7 के अनुसार प्रिन्सिपल पद पर पदोन्नति के नियम 28/7 की व्याख्या >
1. प्रिन्सिपल पद पर पदोन्नति के लिये ग्रुप ‘ई’ (वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी) एवम ग्रुप ‘एफ’ (हेडमास्टर और लेक्चरर) दोनों ही पद पात्र है.
2. “प्रिन्सिपल पद पर पदोन्नति के लिये ग्रुप ‘ई’ (वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी) व ग्रुप ‘एफ’ (हेडमास्टर और लेक्चरर) के पद पर नियुक्त व्यक्तियों की कामन सीनियरिटी उनकी संस्थायी नियुक्ति की तारीख में संदर्भानुसार अवधारित की जानी चाहिए”.
3. इस नियम में पदोन्नति के पात्र व्यक्ति की वरिष्ठता पर विशेष जोर दिया गया है.
4. इस नियम में यही विशेष ध्यान देने योग्य बात है की पदोन्नति के पात्र की संस्थायी नियुक्ति को वरिष्ठता का आधार माना गया है, किसी ग्रुप या पद को वरिष्ठता का आधार नहीं माना गया है. अर्थात यहाँ व्यक्ति को नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठ माना है न की किसी पद पर पहुँच जाने से. जबकि रेसा द्वारा हेडमास्टर सेकण्डरी स्कुल को लेक्चरार से उच्च पद बताया जा रहा है.
5. इस नियम में स्पष्ट है की ग्रुप ‘ई’ (वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी) के पद पर पदोन्नति का अर्थ ग्रुप ‘डी’ प्रिन्सिपल के पद पर पदोन्नति का पड़ाव नहीं है. क्योंकि ग्रुप ‘ई’ भी पदोन्नति के पात्रों में से एक है. लेकिन पूर्व के वर्षों में प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति में ग्रुप ‘ई’ को पड़ाव मानकर पदोन्नति की गयी है जो उचित प्रतित नहीं होती है.
6. इस नियम से यह स्पष्ट होता है कि ग्रुप ‘एफ’ के सदस्यों की (हेडमास्टर/लेक्चरर) पदोन्नति सीधी प्रिन्सिपल (ग्रुप ‘डी’) के पद पर हो सकती है. अर्थात प्रिन्सिपल (ग्रुप ‘डी’) के पद पर पदोन्नति के लिये ग्रुप ‘ई’ (वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी) के पद पर पदोन्नत होना कतई आवश्यक नहीं है. यदि
7. यदि प्रिन्सिपल के पद पर पदोन्नति के लिये ग्रुप ‘ई’ के (वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी) पद पर पदोन्नत होना आवश्यक होता तो ग्रुप ‘एफ’ (हेडमास्टर/ लेक्चरर) का सन्दर्भ पदोन्नति के पात्र के रूप में इस नियम में देने की जरूरत ही नहीं थी.
8.
प्रिन्सिपल के पद पर पदोन्नति के लिये ग्रुप ‘ई’ (वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी) के पद को किसी भी प्रकार की वरीयता नहीं दी गयी है. यदि ग्रुप ‘ई’ को पदोन्नति में वरीयता दी गयी होती तो उसका उल्लेख इस नियम में अवश्य ही किया गया होता. जैसे नियुक्ति में न्यूनतम योग्यता से अधिक योग्यता वाले पात्रों को मेरिट में अतिरिक्त अंक दिये जाते है तो इस तथ्य का विशेष उल्लेख किया जाता है. किन्तु ग्रुप ‘ई’ के लिये ऐसा कोई उल्लेख नहीं है.
9. जब किसी एक पद पर पदोन्नति के लिये एक से अधिक पात्र होते है तो पदोन्नति के स्तर पर सभी पात्र समकक्ष व समस्तर पर माने जाते है. नियम 28 उपनियम 7 में भी सभी पात्रों को समकक्ष व समस्तर पर रखते हुए “सामान्य (कामन) वरिष्ठता उनकी (ग्रुप ‘ई’ एवम् ‘एफ’ में वर्णित पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की) संस्थायी नियुक्ति की तारीख में संदर्भानुसार अवधारित किये जाने का प्रावधान रखा गया है.
संस्थायी नियुक्ति की तारीख > किसी भी कार्मिक की ‘राजस्थान शिक्षा सेवा’ में ‘पहली नियुक्ति की तारीख’ चाहे वह सीधी भर्ती से नियुक्त हुआ हो अथवा पदोन्नति से राज्य सेवा में पहुंचा हो. उसकी राज्य सेवा में नियुक्ति तिथि ही संस्थायी नियुक्ति तारीख होती है.